हमारा कार्य भारत

हमारा मानना है कि हर व्यक्ति का जीवन एक समान कीमती है। अगर हम साथ मिल कर काम करें तो असमानता और गरीबी को कम कर सकते हैं। अपने साझेदारों के साथ मिल कर हम स्वास्थ्य, स्वच्छता, वित्तीय सुविधाओं तक लोगों की पहुंच और कृषि के विकास जैसी चुनौतियों पर काम करते हुए, एक अरब से ज्यादा भारतवासियों के जीवन को बेहतर करने में प्रयासरत हैं।

हम क्या करते हैं

भारत अपने नागरिकों के स्वास्थ्य और सामाजिक विकास में काफी गंभीरता से निवेश कर रहा है। इससे लाखों लोगों को देश के विकास और आर्थिक प्रगति में भागीदार बनाया जा सकेगा। बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सभी प्रयास भारत के लक्ष्यों से जुड़े हैं। हम भारत की केंद्र और राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करते हैं। इसके साथ ही, सामाजिक समूहों, गैर लाभार्थ संगठनों, अकादमिक संस्थानों, निजी क्षेत्र और विकास संगठनों के साथ अपने साझा लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए भागीदारी करते हैं।

बिहार और उत्तर प्रदेश पर विशेष ध्यान देते हुए, हम नए समाधान तैयार करते हैं ताकि महत्वपूर्ण सेवाओं की गुणवत्ता और उनका दायरा बढ़ाया जा सके।

इस देश में मुख्य रूप से हम इन चार क्षेत्रों में काम कर रहे हैं: स्वास्थ्य, स्वच्छता, कृषि विकास और गरीबों के लिए वित्तीय सेवाएं

निदेशक का संदेश

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में, हम विश्वास करते हैं कि सभी जीवनों का मूल्य समान है। इसलिए हम भारत के गरीबों और अधिकारविहीनों के जीवन को बेहतर बनाने पर ध्यान केन्द्रित करते हैं।

हालांकि हम जानते हैं, कि हम संस्थानों के बृहद और विविधतापूर्ण परितंत्र से संबंधित हैं जो यह उद्देश्य साझा करते हैं, इसलिए हम एक साथ कार्य करने और हमारी अद्वितीय विशेषज्ञता का योगदान देने के अवसरों की तलाश करते हैं।

हमारी साझेदारी में, हम एक महत्वपूर्ण परंतु सीमित भूमिका निभाते हैं। यह भूमिका इस तथ्य से और भी सीमित हो जाती है कि हमारे संसाधन अत्यंत निम्न हैं जब इनकी तुलना भारतीय राज्य सरकारों, भारत सरकार, और भारतीय कंपनियों से की जाती है क्योंकि यह पहले से ही अपनी विकास प्राथमिकताओं में निवेश कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य फिर, भारत के अपने निवेशों का सर्वश्रेष्ठ संभव परिणाम प्राप्त करवाने में रणनीतिक समर्थन प्रदान करना है।

यह समर्थन हमारे द्वारा प्रदान तकनीकि विशेषज्ञता से आरंभ होता है। हमारा फाउंडेशन प्रमुख विकास चुनौतियों का अत्याधुनिक समाधान प्राप्त करने के लिए प्रमुख स्थानीय और वैश्विक विशेषज्ञों को एक साथ लाता है। अतिरिक्त विशेषज्ञता की ज़रुरत पड़ने पर, हमारे पास वैश्विक समाधानकर्ता भी उपलब्ध हैं जो विभिन्न क्षेत्रों में अनुभवी हैं। हमारी आयोजन क्षमता-विश्व के प्रत्येक क्षेत्र और वर्ग से बौद्धिक संसाधनों को प्राप्त करने की हमारी क्षमता-आवश्यकताओं के अनुसार समायोजित होने के अनोखे लचीलेपन का निर्माण करती है।

इस वर्ष का पत्र हमारे द्वारा किए गए विभिन्न प्रकार के गठबंधनों का ठोस उदाहरण देता है। हमें उम्मीद है कि इन कहानियों को साझा करने से लोगों को समझने में सहायता मिलेगी कि हम भारत नव परिवर्तनों के पर्यावरण में कितना सटीक बैठते हैं। हमें आशा है कि इससे सहयोगियों और अनुदानकर्ताओं को सही दिशा मिलेगी ताकि वह परिवर्तनों को संभव बना सकें। अंततः हम आशा करते हैं कि वह स्पष्ट करें कि भारत में लाखों लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए कितना उत्साहपूर्ण कार्य हो रहा है।


 

सरकार के साथ काम करना

एक दशक से भी पहले, बिहार सरकार ने महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य देखभाल को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया, और इस लक्ष्यकेन्द्रित प्रयास ने प्रभाव दिखाना प्रारंभ कर दिया है। तब से भारत के इस तीसरे सबसे बड़े राज्य में बाल मृत्यु दर में एक तिहाई की कमी आई है।

लोगों की भलाई में इस निवेश के भाग के तौर पर, राज्य सरकार ने साझीदारों की तलाश की जो तकनीकी समर्थन प्रदान कर सकें। हमारे फाउंडेशन के पास, पहले से ही इन क्षेत्रों - मातृत्व, नवजात, और बाल स्वास्थ्य, पर काम कर रही एक टीम थी जिसमें बिहार अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहता था, इसलिए 2010 में हमने एक साथ काम करना प्रारंभ कर दिया।

बिहार की जन स्वास्थ्य प्रणाली में हजारों स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हैंः प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाओं के डॉक्टर और सहायक नर्स मिडवाइफ़ से लेकर आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं तक जो समुदायों में महिलाओं को मूलभूत सलाह और देखभाल सेवाएं उपलब्ध करवाते हैं। हमने आठ आरंभिक राज्यों में इन उपलब्धकर्ताओं की सेवाओं की गुणवत्ता को उन्नत बनाने के लिए सरकारी परीक्षित नवीन तरीकों और तकनीकियों से सहायता करना प्रारंभ किया। उदाहरण के लिए, महिलाओं को स्तनपान जैसे स्वास्थ्यकर अभ्यासों के बारे में सलाह देने में सीमावर्ती कार्यकर्ताओं की सहायता करने के लिए, हमने डिजिटल तकनीक पर आधारित अगली पीढ़ी की शिक्षण सहायता विकसित की। सुविधाओं में, हमने एक नर्स सलाहकार कार्यक्रम की स्थापना की है जिसने, अन्य सफलताओं के साथ ही, प्रक्रिया के पहले और बाद में हाथ धोने और दस्ताने पहनने वाली नर्सों की संख्या को दोगुना कर दिया है।

हालांकि, ये हस्तक्षेप सफल परिणाम लेकर आए हैं, प्राप्त परिणामों के आंकड़ों के निरीक्षण ने खुलासा किया है कि मातृत्व, नवजात, और बाल उत्तरजीविता पर उनका अविश्वसनीय प्रभाव था, जो कि कार्य का मुख्य लक्ष्य था। इसलिए, बिहार सरकार ने, हमारे फाउंडेशन और हमारी अनुदेयी केयर इंडिया ने इन निवेशों को अत्याधुनिक विधियों और उपकरणों में विस्तारित करने के लिए सहमती जताई - और इन्हें अन्य जिलों में विस्तारित करने का फैसला लिया ताकि विशेष समस्याओं का समाधान किया जा सके और सर्वश्रेष्ठ अभ्यासों में निवेश द्वारा आम स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाया जा सके।

अब साझेदार बिहार की स्वास्थ्य प्रणाली को बेहतर बनाने के प्रति कार्य कर रहे हैं - बजट बनाने से लेकर प्रबंधन अभ्यासों के इंतजाम और आंकड़ों को एकत्र करने तक।

यह दो-तरफा दृष्टिकोण, एक मजबूत स्वास्थ्य डिलीवरी प्लेटफॉर्म और तकनीकि समाधान का संगम है जिससे बिहार अपने लक्ष्यों को पूरा कर सकेगा और साथ ही ऐसे उदाहरण उत्पन्न करेगा, जिससे अन्य साझीदारों को मदद् मिलेगी। विशेषतौर पर अपने लोगों के लिए स्वास्थ्य और मानव पूंजी संभावना में निवेश करने में रुचि रखने वाली अन्य राज्य सरकारों को।


 

कोर्पोरेट के साथ काम करना

स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत बनाने का तरीका यह सुनिश्चित करना है कि सप्लाई चेन यानी आपूर्ति श्रृंखला काम कर रही हो और स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के पास हमेशा आवश्यकतानुसार उपकरण व दवाइयां मौजूद हों, जैसा कि हम बिहार में कर रहे हैं। दूसरा तरीका नए और बेहतर उपकरणों और दवाओं का विकास करना है। भारत के पास इस बारे में तकनीकी जानकारी है कि इस क्षेत्र में विश्व में अग्रणी कैसे रहना है।

हालांकि, चुनौती शोध व विकास का मंहगा होना है। यह विशेष समस्या बन जाती है जब दवाएं गरीब लोगों के लिए हों और साथ ही यह स्पष्ट नहीं है कि मांग कितनी होगी। इसलिए हमारी फाउंडेशन ने जैव-प्रौद्योगिकी और दवा कंपनियों के साथ, विशिष्ट उत्पादों के विकास में अनुदान देकर या उन उत्पादों के उपलब्ध हो जाने के बाद उनके एक निश्चित स्तर की मांग की गारंटी देकर, भारत में इस जोखिम और अनिश्चितता को थोड़ा सा कम करने के लिए काम किया है। हमें उम्मीद है कि यह सहयोग न सिर्फ शीघ्रतापूर्ण जिन्दगियों को बचाएंगे बल्कि यह भी सुनिश्चित करेंगे कि देश में उच्च गुणवत्ता, मूल्य-प्रभावी जन स्वास्थ्य समाधानों का एक स्थिर प्रवाह बना रहे।

हमनें किफायती टीकों का विकास करने के लिए भारत में कंपनियों के साथ काम किया है जो निमोनिया, कॉलरा और मियादी बुखार सहित जानलेवा बीमारियों से बच्चों की सुरक्षा करती हैं। हमनें जर्मन खसरा वैक्सीन पर बायो ई (हैदराबाद) और रोटावायरस वैक्सीन, रोटावैक पर भारत बायोटेक (हैदराबाद) के साथ काम किया है, जो कि अब देश के प्रतिरक्षण कार्यक्रम के भाग के तौर पर स्तरीकृत की जा रही हैं।

पुणे में सीरम इंस्टीट्यूट एक संस्था है जिसके साथ हम करीबी रूप से काम करते हैं। 1966 में स्थापित, सीरम विश्व में किसी अन्य टीका उत्पादक के मुकाबले अधिक खुराकें पहुंचाती है। यह अनुमान लगाया गया है कि विश्व के दो तिहाई बच्चों को सीरम इंस्टीट्यूट के टीके की कम से कम एक खुराक प्राप्त होती है।

एक दशक पूर्व, सीरम ने फाउंडेशन की सहायता से एक टीके, मैनएफ्रिवैक ए का विकास किया था, जिसने इस जटिल परियोजना के लिए सहयोगियों के एक शक्तिशाली संघ को एक साथ लाने में सहायता की थी। इस टीके ने, जिसका प्रयोग सबसहारन मेनिनजाइटिस बेल्ट में किया जा रहा था, खतरनाक मेनिनजाइटिस वायरस का सफाया कर दिया है। अब हम, सीरम के साथ न्यूमोकॉकल कांजूगेट वैक्सीन के विकास पर काम कर रहे हैं।

हमें उम्मीद है कि हमारे समर्थन ने देश में जीवन रक्षक टीकों की उपलब्धता को बढ़ाया है, और भारतीय वैक्सीन उद्योग को कामयाब बनाया ताकि यह सभी भारतीयों के जीवन में सुधार लाने के लिए उन्नतियों को जारी रख सके।

 

समुदायों के साथ काम करना

निजी और सार्वजनिक, दोनों क्षेत्र के संस्थान और सरकार पूरे भारत में उत्पाद और सेवाएं उपलब्ध करवाते हैं। हालांकि देश में परिवर्तन के सबसे महत्वपूर्ण एजेंट लोग स्वयं हैं। हम देश भर के शहरों, कस्बों और गाँवों में निवासियों को सशक्त बनाने के लिए दर्जनों समुदाय-आधारित संस्थानों के साथ करीबी तौर पर काम करते हैं।

इनमें से बहुत सारे संस्थान स्वयं-सहायता समूहों कार्यों को बेहतर बना रहे हैं। व्यापक रूप से एक भारतीय नव पद्धति, स्वयं-सहायता समूहों को अब सरकारी समर्थन भी प्राप्त हो रहा है क्योंकि प्रमाण सिद्ध करते हैं कि एक-साथ कार्य करने वाले समुदाय के सदस्य एक दूसरे को सशक्त बनाते हैं और एक दूसरे के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाते हैं।

2012 में, प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) ने यह सीखने के लिए परिवर्तन नामक एक प्रमुख परियोजना चलाई ताकि स्वयं-सहायता समूह के सदस्यों को स्वस्थ व्यवहार अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाए तब भी जब अस्वास्थ्यकर व्यवहार गहराई से समाए हुए हों। उन्होंने स्वच्छता, पोषण, और आरोग्य अभ्यासों पर ध्यान केन्द्रित किया, क्योंकि भोजन और खाने से संबंधित प्रथाओं को बदलना कठिन है। परिवर्तन परियोजना ने पाया कि एकल समाधान, जो हो सकता है कि सभी के लिए काम न करे, प्रदान करने की जगह विभिन्न स्वास्थ्यकर विकल्प उपलब्ध करवाना ही इसका हल है।

अब पीसीआई वह प्रयोग कर रहा है जो उसने आरंभ में, बिहार के जीविका कार्यक्रम द्वारा समर्थित हजारों स्वयं-सहायता समूहों के साथ कार्य करके सीखा था, और यह उन व्यवहारों में भी उन्नति देख रहा है जिन्हें बदलना परंपरागत रूप से भी काफी धीमा था। अध्ययनों से पता चला है कि जिन महिलाओं को पीसीआई दृष्टिकोण के सम्मुख लाया गया था उन्होंने अपने बच्चों को विविध और स्वास्थ्यपूर्ण आहार खिलाने की ओर दोगुने से अधिक इच्छा दिखाई, जिसका अर्थ है कि उनके बच्चों के दीर्घकालिक कुपोषण से गुजरने की संभावना बहुत कम है और वह अधिक उत्तरजीवी होंगे और आगे बढ़ेंगे।

अधिकतर समान समुदायों में, जहां पीसीआई कार्य कर रही है, डिजिटल ग्रीन नामक संस्था, जिसकी स्थापना 2007 में हुई थी, उन कृषि विस्तार सेवाओं को नाकाम कर रही है, जिनसे किसान दशकों से परिचित थे।

औसतन, किसान के पास कृषि विज्ञान के बारे में सलाह, दूर स्थित एक अधिकारी से आती है जो स्थानीय स्थितियों के बारे में पूरी तरह से अपरिचित होता है। इस मॉडल के विपरीत, डिजिटल ग्रीन ने स्थानीय लोगों को स्थानीय फसलों के बारे में जानकारी दे रहे किसानों के प्रशिक्षण वीडियो को स्थानीय भाषा में फिल्माने का प्रशिक्षण दिया।

पिछले दशक में, डिजिटल ग्रीन ने 13 लाख छोटे किसानों को निर्देश उपलब्ध करवाने के लिए 18 भारतीय भाषाओं में 4000 से अधिक वीडियो का उपयोग करने के लिए 11,000 से अधिक विस्तार एजेंटों को प्रशिक्षित किया था। बिहार में एक अध्ययन में पाया गया, डिजिटल ग्रीन के वीडियो देखने वाले चावल किसानों ने अधिक विकसित तकनीकों को अधिक प्रतिशत में अपनाया और इसे न अपनाने वाले किसानों की अपेक्षा अपनी उपज में 20 प्रतिशत से अधिक वृद्धि प्राप्त की।

यह दृष्टिकोण न सिर्फ महाद्वीप भर में फैले हुए किसानों की बड़ी संख्या तक सूचना पहुंचाने का एक बेहतर तरीका है; बल्कि यह किसानों को उनके खुद के भविष्य की योजना बनाने में सशक्त बनाता है।

 

संस्थानों के साथ काम करना

जिन भी साझेदारियों का ऊपर वर्णन किया गया है उन सब की खूबसूरती उनके स्थायित्व में है। वह नए ज्ञान और कौशल का उत्पादन कर रहे हैं, जिसका उपयोग संस्थाएं लोगों के जीवन का विकास करते रहने में करेंगी। डिजिटल ग्रीन, पीसीआई, भारत बायोटेक, बॉयोई, सीरम और भारत राज्य सरकारें आने वाले वर्षों के लिए भारत के भविष्य का निर्माण कर रही हैं।

हम क्षमता निर्माण में सहायता करने की एक और भूमिका निभा रहे हैं ताकि संस्थान और इंस्टीट्यूट चुनौतियों के उत्पन्न होते ही प्रतिक्रिया देने में सक्षम हो जाएं। हम तकनीकी विशेषज्ञता को महत्व देने में विश्वास रखते हैं, यदि हमारे पास महत्वपूर्ण विषयों पर साझा करने के लिए कुछ नहीं है, तब हम उनमें निवेश करते हैं जो विशेषज्ञता का समर्थन करते हैं।

भारतीय स्वछता गठबंधन के आदर्श-स्थानांन्तरण लक्ष्य पर विचार करें, जो एक पुरानी तकनीक (खर्चीली सीवर प्रणाली) को किसी सस्ती और बेहतर तकनीक से स्थानांन्तरित करने का उद्देश्य रखता है। इसे पूरा करने के लिए, इसे इस बारे में आधुनिकतम विचारों तक पहुंचने की आवश्यकता है कि नई स्वच्छता प्रणालियों और तकनीकों को कैसे डिजाइन व लागू किया जाए। हमने जल, आरोग्य और स्वच्छता संस्थान (वॉशई), में निवेश करके सहायता की है, जो समुदाय में वॉश से संबंधित कार्यक्रमों के लिए, प्रशिक्षण आयोजित करने, अनुसंधान करने और प्रतिपालन करने और लागू करने में, सरकारों की सहायता करता है।

वॉशई, जो आवास और नगर मंत्रालय के साथ करीबी तौर पर काम करती है, ने मुडुरई कामराज विश्वविद्यालय में 100 से अधिक पेशेवरों को प्रशिक्षित किया है और अभूतपूर्व शौचालय और मल कीचड़ प्रबंधन तकनीकियों का विकास किया है। उदाहरण के लिए, सुन्धी शौचालय समस्याओं की एक श्रृंखला का समाधान करते हैं जो महिलाओं को सुरक्षित रूप से जन सुविधाओं का उपयोग करने से रोकते हैं। इसमें शहरी और ग्रामीण दोनों तरह की महिलाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए, भारतीय और पश्चिमी दोनों प्रकार के शौचालय हैं। इसमें एक सैनिटरी नैपकिन वितरक के साथ ही उपयोग किए गए सैनिटरी नैपकिन के निपटान के लिए एक भट्टी होती है, और ये हाथ धोने के लिए वाशबेसिन और दर्पण से लैस होते हैं। इसके अलावा, यह किफायती हैं और पूरी इकाई को लगवाने में केवल दो दिन लगते हैं।

वॉशई, को तहेदिल से धन्यवाद, भारतीय शहरी स्वच्छता न सिर्फ अग्रणी बन गई है; बल्कि यह देश के शहरों को अधिक सुरक्षित बना रही है।

हमनें कई क्षेत्रों में विशेषज्ञता की रचना करने के प्रति कार्य किया है जो भारत के विकास संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण हैं, सामाजिक और व्यवहार परिवर्तन के बारे में कैसे संवाद करें से लेकर आंकड़ों को कैसे एकत्र और विश्लेषित करें तक। यह निवेश ज्ञान का निर्माण कर रहा है जो हम सभी को और भी प्रभावी बनाता है।

 

निष्कर्ष

उन संस्थानों की छोटी सी सूची जिनके साथ हम कार्य कर रहे हैं, एक बात को स्पष्ट करती हैः भारत में नवपरिवर्तनों और महत्वाकांक्षाओं की बाढ़ आ रही है। यदि प्रत्येक वर्ग से नवप्रवर्तक अपने विशेष कौशल को मिलाते हुए एक साथ कार्य करें, तो हम अपने लक्ष्यों को तेजी से प्राप्त कर सकते हैं।

बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन में हम अपनी भूमिका को, सरकार, निजी कंपनियों, नगर समाज संस्थानों, और समाज जिसका वे प्रतिनिधित्व करते हैं, उनके प्रयासों में यथासंभव प्रभावी और सक्षम समर्थक के रूप में देखते हैं।

विभिन्न संस्थानों के साथ साझेदारी से हमें अद्वितीय प्रतिभाओं से मदद् लेने, संसाधन, उद्योग के बारे में जानकारी, शैक्षिक क्षेत्र और सार्वजनिक क्षेत्र की जानकारी से हमें संवेदनशील समुदाय की बेहतर सेवा प्रदान करने में मदद् मिलती है। मिलकर कार्य करने से हम भारत के भविष्य को बेहतर बना सकते हैं।

नचिकेत मोर, पीएचडी
निदेशक, भारत कार्यालय,
बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन